MyIndia Initiative- Digital Volunteer Programme




The Concept: The Digital Volunteer Programme is aimed at people who are keen to use their personal social presence on different  social media platforms to talk about Government schemes and programmes. Deeply rooted in the ideals of Participative Governance, the programme aims at helping the Government of India achieve a real time engagement with people leading to a personalized interaction with the target groups. 

You may associate with this Initiative if you:
1.Have an active Twitter and Facebook account
2.Are Proficient in using social media group collaboration tools like Tweetdeck, Hootsuite etc.
3.Have an active and regularly checked email account
4.Access to a Computer/Smartphone with Internet
5.Are willing to use your personal social presence to help Government spread a word about its policies and programmes


To facilitate a personalised interaction, a Digital Volunteer
1. may like to talk  about Government Initiatives by retweeting the  messages tweeted  by MIB's Twitter Handle @MIB_India
2. may share  Ministry's Tweets (@MIB_India), Facebook Posts  (facebook.com/inbministry),  Blog posts (inbministry.blogspot.in)  and share YouTube Channel videos(youtube.com/user/inbministry) on Social Networking sites
3. may mention Official Twitter handle of MIB @MIB_India in tweets to facilitate real time engagement.
4. may suggest ways to reach out to people on social media




Text of Prime Minister Shri Narendra Modi’s keynote address at event organized by Nikkei Inc. and Japan External Trade Organization (JETRO)

उद्योग जगत के सभी वरिष्‍ठ महानुभाव 

मैं जेट्रो का आभारी हूं, निक्‍केइ का आभारी हूं, कि मुझे आज आप सबके साथ बातचीत करने का सौभाग्‍य मिला है। मैं जब यहां आ रहा था तो, ये सभी वरिष्‍ठ महानुभाव मुझे बता रहे थे और बड़े आश्‍चर्य के साथ बता रहे थे कि हमारे इतने सालों में इतना बड़ा गैदरिंग पहली बार हुआ है। मुझे कह रहे थे कि 4000 लोगों ने अप्‍लाई किया था, लेकिन हमारे पास एकोमोडेशन पूरी नहीं होने के कारण आधे लोगों को निराश करना पड़ा है। ये इस बात का संकेत है कि अब जैसे भारत ‘लुक ईस्‍ट’ पालिसी लेकर चल रहा है, वैसे जापान ‘लुक एट इंडिया’ इस मूड में आगे बढ़ रहा है। 

जब वाजपेयी जी भारत के प्रधानमंत्री थे और एक्‍सीलेंसी मोरी जी यहां प्रधानमंत्री थे, तब से यह रिश्‍ता बड़ा सघन बना। मेरा भी सौभाग्‍य रहा, मैं पहले भी आया। मैंने हर बार देखा कि जापान जिस प्रकार की कार्य संस्‍कृति का आदी है, जापान जिस प्रकार के गवर्नेंस का आदी है, जापान ने जिस प्रकार से इफीशिएंसी और डिसीप्लिन को आत्‍मसात किया है, अगर उस इन्‍वायरमेंट को प्रोवाइड करते हैं तो जापान को भारत में भी अपनापन महसूस होगा। 

तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, 2007 में, मैं यहां आया। जो बातें आप से सीखीं ,समझी, देखी, उसको मैंने भली-भांति वहां लागू किया था। 2012 में आया, मैंने दुबारा उसको और बारीकी से देखा फिर उसको लागू किया। आज परिणाम यह हुआ कि जब मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच आया हूं, तब मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, कि आपको जापान के बाहर कहीं नजर डालनी है तो, मुझे नहीं लगता है कि अब आपको इधर-उधर देखने की जरूरत है। 

अब एक ऐसी जगह है, जो आपकी चिर-परिचत है। सांस्‍कृतिक रूप से तो चिर-परिचित है, लेकिन अब अपने आप के विस्‍तार के लिए, अपने आप को ग्रो करने के लिए, आप जिस जगह की तलाश में हैं, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं आपको निमंत्रण देता हूं, शायद भारत से बढ़कर के आप के अनुकूल कोई जगह नहीं है। ये मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं। 

मुझे अभी सरकार में सिर्फ 100 दिन हुए हैं। एक्‍सीलेंसी मोरी जी के साथ भी मेरा संबंध बहुत पुराना है और प्रधानमंत्री आबे जी के साथ भी बहुत पुराना संबंध है। पिछले तीन दिनों में मैंने देखा है कि जापान का भारत के साथ जुड़कर के अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। उसमें हमारा विश्‍वास पक्‍का हो गया है। कल का हमारा ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट आपने देखा है। मैं समझता हूं, किसी भी जापान के उद्योगकार के लिए भारत में आकर के कार्य प्रारंभ करना, इससे बड़ा स्‍ट्रांग मैसेज कोई नहीं हो सकता है। मेरी सरकार बनने के बाद मैने एक विजन के रूप में लोगों के सामने रखा है, ‘मेक इन इंडिया’। 

मैं छोटा था, तो कोई कहता था ‘मेड इन जापान’, तो हम लागों का मन करता था कि कुछ देखने की जरूरत नहीं है कि किस शहर में बना है, किस कंपनी में बना है। ले लो, ये प्रतिष्‍ठा थी। हम ‘मेक इन इंडिया’ कह रहे हैं, इसका मतलब यह है कि हम ऐसा इन्‍वायरमेंट आपको देना चाहते हैं, कि आपकी वैश्विक मांग है, जो आपके प्रोडक्‍ट की, उस वैश्विक मांग को अगर पूरा करना है तो आज जापान, जो कि हाई कॉंस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग की ओर चल पड़ा है, आपकी पूरी इकोनोमी हाई कॉस्‍ट एंड वाली बनती जा रही है। इसलिए आपके लिए बहुत अनिवार्य है कि लो कॉम्‍स्‍ट मैन्‍यूफैचरिंग की संभावनाएं हों। ‘ईज़ आफ बिजनेस’ का वातावरण हो। स्किल्‍ड क्‍वालिटी मैनपावर अवेलेबल हो। 

तो मैं विश्‍वास से कहता, जो दस साल में मिरेकल आप जापान में रह कर के आपकी कंपनी का करते हैं, आप वो मिरेकल दो साल के भीतर-भीतर हिन्‍दुस्‍तान में कर सकते हैं। इतनी संभावनाओं का वो देश है आप विश्‍व में अपने प्रोडक्‍ट को अगर पहुंचाना चाहते हैं, और कंपीटिटिव भी मार्केट है। अगर विश्‍व में अगर प्रोडक्‍ट पहुंचाना चाहते हो तो, इट इज ए गॉड गिफ्टेड लोकेशन है, इंडिया का। हमारा बहुत ही वाइब्रेंट सी कोस्‍ट है, वहीं से आप वेस्‍टर्न पार्ट आफ दि वर्ल्‍ड, मिडिल ईस्‍ट से लेकर, आगे कहीं भी जाना है, मैं समझता हूं, इससे बढ़कर कोई सुविधा नहीं होती है। 

जब सुजूकि, मारूति उद्योग के संबंध में लोग, मुझसे मिलने आते थे, तो मैंने उन्हे एक हिसाब समझाया था। मैंने कहा- आप गुड़गांवां में कार बनाते हैं और एक्‍सपोर्ट करते हैं, तो समुद्र तट पर जाने में आपकी कार को जाने में 9000 रुपए का खर्च लगता है। लेकिन समुद्र तट पर यदि आप गाड़ी बनाओगे तो हर कार पर आपका 9000 रुपए बच जाएगा। तो उन्‍होनें कहा कि मुझे तो यह व्‍यापारिक गुर किसी ने सिखाया ही नहीं और वह एक बात ऐसी थी कि उनको निर्णय करने में क्लिक कर गई। 

पिछले दिनों में मैंने इतने वहां पर इतने महत्‍वपूर्ण निर्णय किये, जैसे – डिफेंस के सेक्‍टर में। एक समय था, मेरे यहां इतने सारे रिस्‍ट्रीक्‍शंस थे, डिफेंस इक्विपमेंट मैन्यूफैक्‍चरिंग में, यदि डिफेंस के लिए एक मुझे ट्रक चाहिए तो वो भी डिफेंस के रूल्‍स एवं रेगुलेशन के रिस्ट्रिक्‍शंस में पड़े हुए थे। हमने इन 100 दिन के अंदर-अंदर करीब-करीब 55 प्रतिशत ऐसी चीजों को उस सारी कानूनी व्‍यवस्‍था से बाहर निकाल दिया। हमने कहा कि आइए, ये सब आप जैसे सामान्यत: कोई भी चीज आप प्रोड्यूस करते हैं, आप कर सकते हैं और डिफेंस उसका परचेज करेगा। हमारा बहुत बड़ा मार्केट विदिन इंडिया है। डिफेंस मैन्‍यूफैक्‍चरिग सेक्‍टर में अगर आप आते हैं, तो मुझे विश्‍वास है कि आप न सिर्फ भारत की आवश्‍यकताएं, बल्कि विश्‍व के अनेक छोटे-छोटे देश हैं, जिनकी रिक्‍वायरमेंट को पूरा करने का, ऐसी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग का काम आप हिंदुस्‍तान की धरती पर कर सकते हैं। 

आपको जानकर के हैरानी होगी, भारत की पहचान साफ्टवेयर में है। हमारे टैलेंट, हमारे नौजवान साफ्टवेयर के क्षेत्र में बहुत बड़ी पहचान बनायी है। आपने हार्डवेयर में अपनी ताकत बनायी है। लेकिन साफ्टवेयर हार्डवेयर के बिना अधूरा है। हार्डवेयर साफ्टवेयर के बिना अधूरा है। भारत जापान के बिना अधूरा है, जापान भारत के बिना अधूरा है। 

अगर हार्डवेयर इंडस्‍ट्री, भारत आपको निमंत्रण देता है। भारत के टैलेंट का साफ्टवेयर, आपकी बुद्धिमानी और मेहनत और बिजनेस एक्‍सीलेंस के कारण तैयार हुआ हार्डवेयर। अगर ये मेलजोल हो जाए, आप विश्‍व के अंदर बहुत बड़ा मिरेकल कर सकते हैं। मैंने देखा है कि स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज का एक बड़ा नेटवर्क ऐसा है, कि जो हार्डवेयर की दिशा में काम कर रहा है।

आज भारत का अपना इंपोर्ट इतना है। हमारा आज सबसे बड़ा इंपोर्ट पेट्रोलियम और आयल सेक्‍टर का है। हमारा एक अनुमान है कि 2020 में हमारा सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट इलेक्‍ट्रानिक्‍स गुड्स का होने वाला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं, कितना बड़ा मार्केट है। जापान का व्‍यापारी इंतजार करेगा क्‍य ? इतना बड़ा मार्केट आपका इंतजार कर रहा है। अगर आपका वहां लो कॉस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग होता है, आपको इफिशिएंट गवर्नेंस की अनुभूति होती है। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि आपकी स्थिति बदल जाएगी। 

आमतौर पर भारत की पहचान यह बन जाती है कि छोड़ो यार, वहां रेड टैप है। पता नहीं सरकारी कारोबार में कब गाड़ी चलेगी। मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, आज भारत में रेड टैप नहीं, रेड कार्पेट है और रेड कार्पेट आपका इंतजार कर रही है। 

हमने ईज़ आफ बिजनेस के लिए इतने सारे नए रेगुलेशन्‍स को लिबरल कर दिया है। शायद विश्‍व में इतनी तेज गति से लिबरलाइज मूड में, सारे हमारे पुराने रूल्‍स और रेगुलेशन्‍स में परिवर्तन लाने का किसी एक सरकार ने काम किया हो तो आज हिंदुस्‍तान की सरकार है। आखिरकार व्‍यापारी को, उद्योगकार को, इंवेस्‍टर को एक सिक्‍युरिटी चाहिए। उसको प्रोपरली ग्रो करने के लिए एक इन्‍वायरामेंट चाहिए। 

आज भारत, किसी को भी आकर के ग्रो करने के लिए प्रोपर इन्‍वायरामेंट के लिए, बहुत तेज गति से आगे चल रहा है। जहां तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सवाल है, अब कभी, जो भी आज भारत में हमारे साथ काम करते हैं, और जिन्‍होंने गुजरात में मेरे साथ काम किया है, कई उद्योगकार हैं, जिन्‍होंने मेरे साथ काम किया है। जिस गति से हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्रोवाइड करने के लिए व्‍यवस्‍थाएं करते हैं, जिस गति से हम निर्णय करते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि आज किसी भी उद्योगकार को उसके लिए कठिनाई हो सकती है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, हिंदुस्‍तान के आज 50 से अधिक छोटे शहर ऐसे हैं, जो मेट्रो रेल के लिए कतार में खड़े हैं। 50 शहरों में मेट्रो ट्रेन लगना, यानी इस फील्‍ड में काम करने वाले लोगों के लिए किसी एक देश में इतना बड़ा बिजनेस कभी सोचा है आपने ? इतना बड़ा बिजनेस अ‍बेलेबल है। आप कितना सारा काम वहां पर कर सकते हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, और खास करके हम एस एम ईज को पोत्‍साहन देना चाहते हैं। स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज को हम इंवाइट करना चाहते हैं। ताकि जॉब क्रिएशन भी हो, मास स्‍केल पर प्रोडक्‍शन भी हो और एक ऐसी हेल्‍दी कंपीटिशन हो, जिसके कारण क्‍वालिटी प्रोडक्‍शन पर बल मिले। इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करने आया हूं कि आप आइए। और कल भी मैंने एक जगह कहा था, 21वीं सदी एशिया की सदी है। मतलब क्‍या है ? इसका मतलब ये है कि विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र ये बनने वाला है। 

विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनने वाला है तो कहां बनेगा ? मैं देख रहा हूं, आज विश्‍व के लोगों को तीन बातों के लिए शायद कोई एक जगह पर ऑपरच्‍युनिटी हो, वैसी विश्‍व में कोई जगह नहीं है। एक स्‍थान पर तीन ऑपरच्‍युनिटी, एक – डेमोक्रेसी, दूसरा – डेमोग्राफी, तीसरा – डिमांड। ये एक ही जगह ऐसी है, जहां डेमोक्रेसी है, जहां पर डिमांड है और जहां पर 65 प्रतिशत पोपुलेशन बिलो 35 एज ग्रुप की है, डेमोग्राफिक डिवीजन। तीनों जगह एक स्‍थान पर हो, वैसी विश्‍व में एक भी जगह नहीं नहीं है और डेमोक्रेसी सेफ्टी, सिक्‍योरिटी एंड जस्टिस की गारंटी देती है। 

आखिरकर बाहर के व्‍यक्ति को ये चीजें चाहिए, जो हम प्रोवाइड करते हैं। उसी प्रकार से, किसी भी उद्योगकार को, मैन्‍यूफैचरर को यंग ब्रेन चाहिए, यंग माइंड चाहिए, यंग पोपुलेशन चाहिए। उत्‍साह-उमंग से भरी हुई जवानी, अगर उसके हाथ में स्किल हो तो मिरेकल कर देती है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। और डिमांड, आप कल्‍पना कर सकते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासी कितना बड़ा मार्केट है। अकेले हिंदुस्‍तान के मार्केट को आप सर्व करें तो भी आज जहां है, वहां से अनेक गुना आपकी कंपनी ग्रो कर जाएगी। एक ऐसी सरकार आई है जो विकास के मुद्दे पर काम कर रही है। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सैक्‍टर को हम बढ़ावा देना चाहते हैं। 

हमारे 100 दिन का रिकॉर्ड देखिए आप। सिर्फ 100 दिन में हमारा जो जीडीपी था, 4.4 - 4.5 - 4.6 पर लुढ़क रहा था। पिछले ढ़ाई-तीन साल में जो हमने अचीव नहीं किया था, वह 100 दिन में कर दिया और 5.7 प्रतिशत का जीडीपी अचीव कर लिया। यह बताता है कि हमारी जो निर्णय हैं, हमारी जो पालिसीज हैं, ‘ईज़ आफ बिजनेस’ की हमारी जो सोच है, उसके कारण ये परिणाम मिल रहे हैं। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि आप आइए, हम सब मिल करके एशिया की पीस और प्रोग्रेस की गारंटी के लिए, जापान और भारत को कंधे से कंधा मिला कर के जितना आगे बढ़ने की जरूरत है। उसी प्रकार से हमने एशिया की समृधि के लिए, भारत जैसे देश की समृधि की दिशा में मिलकर के प्रयास करने की आवश्‍यकता है। 

मैं आप सबको निमंत्रण देता हूं। आप भारत आइए। अपना नसीब आजमाइए। अपना कौशल्‍य आजमाइए। भारत पूरी तरह आपका स्‍वागत करने के लिए तैयार है। मुझे दुबारा एक बार यहां आने का मौका मिला। बार-बार मैं जेट्रो में आता हूं। मैं जब गुजरात में था तो एक जेट्रो का आफिस भी मेरे यहां मैंने खोल दिया था और हमारे कुछ मित्र हैं जो अब गुजराती बोलना भी सीख गए हैं। 

मैं बारीक-बारीक चीजों का केयर करने वाला इंसान हूं। मैं जानता हूं कि ‘ईज़ आफ बिजनेस’ के लिए जितनी छोटी-छोटी चीजें, अगर दो चीजें आप भी ध्‍यान में लाएंगे तो हम तुरंत उसको करने के पक्ष में रहते है। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देने आया हूं। फिर से आपने मुझे बुलाया, इतनी बड़ी संख्‍या में आपका यहां आना, ये बताता है कि आपका हिंदुस्‍तान के प्रति कितना विश्‍वास बढ़ा है। आपकी हिंदुस्‍तान के प्रति कितनी रूचि बढ़ी है और हिंदुस्‍तान और जापान मिलकर के एक नया इतिहास आर्थिक विकास के क्षेत्र में निर्माण कर सकते हैं। इस पूरे विश्‍वास के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद। 

थैंक यू,थैंक यू वैरीमच। 

Courtesy: pib.nic.in

PM's keynote address at event organized by Nikkei Inc. and Japan External Trade Organization (JETRO)

PM to Japanese business community: Come. Make in India.

"India is incomplete without Japan. Japan is incomplete without India."


Courtesy: Photo Division

Prime Minister, Shri Narendra Modi, has urged the Japanese business community to resolve to "Make in India" and assured them that they will receive a conducive business environment in India. Delivering the keynote address at an event hosted by Nikkei Inc. and Japan External Trade Organization, the Prime Minister said that if we can replicate in India the work culture, governance, efficiency and discipline that exists in Japan, Japanese business will feel comfortable in doing business in India. will feel comfortable in India.

Stating that huge possibilities for cooperation existed between the two countries, the Prime Minister said India wants to give an environment to Japanese business to make in India, whatever they wished to supply to the world. He highlighted the possibilities of low-cost manufacturing, skilled manpower and ease of doing business that existed in India. He said that within the first 100 days itself, his Government had moved to cut red tape and ease restrictions for doing business. He said wherever in the world Japanese business wanted to sell, India was the best location to manufacture.

Talking about India`s leadership in software, and Japan`s leadership in hardware, the Prime Minister highlighted that both were incomplete without each other. "India is incomplete without Japan. Japan is incomplete without India," the Prime Minister said.

Giving some more examples of the huge potential for business in India, the Prime Minister said 50 cities were in the queue for metro trains, and a huge demand existed for electronic goods. Nowhere else in the world will you find the combination of democracy, demographics and demand, that exists in India, the Prime Minister said. He also spoke of emerging possibilities due to the Digital India mission and a thrust on solar energy.

In response to a question on whether there is a contradiction between nationalism and globalization, the Prime Minister gave the example of Lord Buddha to say that one`s identity can be retained while globalizing. He said that India believes in the concept of Vasudhaiva Kutumbakam, the whole world as one family, and therefore he saw no contradiction between globalization and nationalism.

Courtesy: pib.nic.in

Initiatives of the Ministry of Environment, Forests & Climate Change


1.       Process for devolution of CAMPA funds for afforestation initiated which will ensure transfer of 30,000 Crores to states.
With the approval of Cabinet, Draft CAMPA Order, 2014 containing provisions for transfer of an amount of 95 % of 35,000/- crorers accumulated with the Ad-hoc CAMPA to inalienable non-lapsable, interest bearing fund to be created under Public Accounts of the respective States/ UTs has been filed before the Hon’ble Supreme Court for their approval before the same is published in the official gazette. Amounts to be realised in future in lieu of forest land diverted for non-forest purpose will also be credited directly to the said fund.
The CAMPA order envisages creation of a permanent institutional mechanism, both at Centre and each State Government, replacing the present body i.e. Adhoc Campa, with a view to ensure effective and expeditious utilization of the accumulated funds by the States, whom the funds actually belong to, in a transparent and effective manner for the purpose of compensatory afforestation, catchment area treatment, assisted natural generation, forest management, protection, infrastructure development, wildlife protection and management, relocation of villages from the Protected areas, managing human-wildlife conflicts, training and awareness generation, supply of wood saving devices and allied activities.
5% funds will be retained by the National CAMPA for the purposes 0f monitoring and evaluation of schemes implemented in the States, setting up of institutes, societies, centre of excellence in the field of forest and wildlife, pilot schemes, standardization of codes/guidelines etc. for the sector.
2.       Transparency ensured by starting online submission of application for Environment and Forest Clearances successfully
As a major step to ensure that the proposals seeking grant of forest clearance are processed in time-bound and transparent manner, a web portal for online filing and monitoring the forest clearance proposal applications has been launched. The portal will minimize the need for human interface between project proponents and officials dealing with Forest Clearance proposals in the Central and the State Governments. The portal will enable real time monitoring of the Forest Clearance proposals so as to ensure that time-lines stipulated for processing of these proposals by various authorities in the Centre and State Governments are adhered to. The portal also has inbuilt features to ensure that proposals complete in all respect only are accepted. Valuable time will thus not be lost to seek and obtain additional information, once a proposal seeking Forest Clearance has already been accepted by concerned authority in the State Government. So far 34 applications have been received online for Forest Clearance.
On-line submission of applications for Terms of Reference (ToRs) and Environment Clearance (EC) has been mandated w.e.f. 1st July, 2014 with a view to increasing transparency in the system and facilitating early decision making. Till now, 219 applications for ToRs and 46 applications for ECs have been received in the Ministry for project proposals in different sectors.
3.       A System of Realtime Monitoring of Ganga Water Quality initiated on the main river. Highly polluting Industries asked to install online continuous emission and effluent monitoring equipments
There are 764 grossly polluting industries (discharging effluents with 100 KG BOD or more effluents) in the five States of the Ganga Basin e.g. Uttarakhand, Uttar Pradesh, Bihar, Jharkhand and West Bengal. 704 of these were inspected by CPCB out of which 48 industries have been issued letters and 180 industries have been issued directions under Section 5 of Environment (Protection) Act, 1986 and under Section 18 (1) (b) of Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974 for abatement of pollution.
There are more than 3,200 highly polluting industries (falling in 17 categories) in the country, which are monitored vigorously by the SPCBs and CPCB. Most of these industries do not have online continuous monitoring system for emissions and effluents. State Pollution Control Boards have been given directions under Section 18(1) (b) of Water Act and Section 18 (1) (b) of Air Act to get online Continuous Monitoring Station equipments installed in all of these industries by 31st March 2015. Directions are being monitored.
Similarly, SPCBs have been issued directions to get online Continuous Monitoring equipments installed in all 175 CETPs, 25 Common Hazardous waste incinerators and 179 Bio Medical waste incinerators in the country
4.       Benchmarks for pollution norms for cement industries upgraded to ensure cleaner environment
Cement industry is one of the major air polluting sector among the 17 category of identified highly polluting industries. There are about 190 large cement plants and 365 mini/small cement plants. Though, number of mini plants is more, the contribution to production is less than 10%. India is second largest producer of cement with cement production of 280 million tonnes during 2013.
Previously, emission standards for Particulate Matter (dust) between 50-400 mg/Nm3 were in place depending upon capacity, type and vintage of cement plant. It has been revised to 30-150 mg/Nm3 and published in gazette on 25.08.2014. International norms for Particulate Matter are between 30-100 mg/Nm3 except Germany (20/10) and Netherland (15). Norms for Sulphur Dioxide (100/200 mg/Nm3 against international norms between 50-500), Oxide of Nitrogen (500-800 mg/Nm3 against international norms ranging between 200-900), Wastewater and guidelines for Storm water have been prescribed for the first time. In brief, the status is:

Pollution Norms
Air
Now
Earlier
Particulate Matter( mg/Nm3)
30-150
50-400
Sulphur Dioxide mg/Nm3)
100-200
not existing
Oxides of Nitrogen mg/Nm3)
500-800
not existing
Wastewater
zero discharge or comply with norms
not existing
Storm water
guidelines prescribed
not existing

5.       Bor tiger reserve created in Maharashtra, approval for special tiger protection force and rewilding of orphaned tiger cubs.
On the recommendation of the National Tiger Conservation Authority, the State Government of Maharashtra has notified Bor Tiger Reserve covering an area of 138.1214 sq.km. (core /critical tiger habitat) on 16 August, 2014.
The Bor Tiger Reserve is rich in biodiversity with a wide variety of flora and fauna, including tiger, co-predators, prey animals and birds. The habitat is on the boundary of Nagpur and Wardha districts, amidst the Satpura-Maikal landscape, forming catchment of the river Bor. The sanctuary is also an important corridor between Tadoba-Andhari and Pench Tiger Reserves of the State.
Bor is the 47th tiger reserve in the country and the 6th tiger reserve of Maharashtra. With Project Tiger coverage, the reserve would receive funding and technical support which would strengthen tiger conservation, besides eco-development to benefit fringe people.
6.       Border roads and all defence infrastructures within 100 kms of Line of Actual Control brought under General Approval scheme.
To expedite creation of requisite infrastructure along Line of Actual Control (LAC) the MoEF on 4th July 2014 accorded general approval under the Forest (Conservation) Act, 1980 for diversion of forest land required for construction and widening of two lane roads by the BRO/ other agencies whom the Ministry of Defence entrusts the job, in the area falling within 100 kilometers aerial distance from the LAC and widening of link roads, between Border roads in the area within 100 kilometer aerial distance from the LAC and National Highways/State Highways/Other State Roads.
Ministry of Defence has also been requested to identify strategic defence infrastructure related activities such as Army Stations, Ammunition Depots, Training Centres and other support infrastructure, such as schools, hospitals, residential quarters etc. which are to be taken up in the area within 100 km aerial distance from the Line of Actual Control and submit the list of such activities along with the proposal for grant of General Approval under Forest (Conservation) Act, 1980).
7.       Forest Clearances for roads in Left Wing Extremism areas brought under General Approval scheme.
To expedite creation of road infrastructure in the Left Wing Extremism (LWE) Affected districts to facilitate the Security Forces to effectively combat Left Wing Extremism, the Ministry has extended general approval under the Forest (Conservation) Act, 1980 for diversion of forest lands for construction of all categories of public roads, except those falling in the Protected areas, irrespective of the area of forest land involved, by Government Departments in 117 LWE affected districts.
Further, relaxation of general approval under the FC Act has been extended from for diversion of forest land from the present 1 hectare to 5 hectares for execution of public utility projects of 15 specified categories by Government Departments in Left Wing Extremism (LWE) affected districts. These categories are Schools; Dispensaries/Hospitals; Medical Colleges, Electrical and Telecommunication Lines; Drinking Water; Water/Rain Water Harvesting Structures; Minor Irrigation Canal; Non Conventional Sources of Energy; Skill up Gradation/Vocational Training Center; Power Sub-stations; All category of public roads; Communication Posts; Police establishments like Police Stations / Outposts / Border Outposts / Watch Towers in sensitive area (identified by Ministry of Home Affairs); Underground laying of optical fiber cables, telephone lines & drinking water supply lines; and quarrying of materials for construction of public roads. This initiative will help in faster construction of the public utilities and help in winning over the confidence of people.
8.       Process of granting permission for forest diversion upto 40 hectares for developmental projects decentralized. 90% files for this purpose won’t come to the Ministry.
The Ministry has decided to delegate powers to the Regional Empowered Committees (REC) to be constituted at each Regional Office of the Ministry to finally dispose of all forest clearance proposals seeking diversion of forest land upto 40 hecatres, except the proposals relating to mining, regularization of encroachments and Hydel Projects. Draft Forest (Conservation) Second Amendment Rules, 2014 to provide for inter-alia constitution of the RECs at each Regional Office of the Ministry under Chairmanship of the concerned Addl. Principal Chief Conservator of Forests (Central) and having inter-alia three non-official experts in forestry and allied disciplines and two representative of the State/ UT concerned have been formulated and sent to the Ministry of Law and Justice for vetting before its publication in the Official Gazette.
More than 90% of proposals seeking forest clearance will now be finally disposed off by the Regional Office. Mere 10% of the proposals for forest clearance will come to the Ministry for decision.
9.       Process of granting permission for forest diversion for all linear projects like Road, Rail, Canals, Transmission and Pipelines decentralized.
To expedite grant of forest clearance to linear projects like Road, Rail, Canal, Transmission Lines and Pipelines, most of which are of public utility nature, the Ministry has decided to delegate powers to grant forest clearance to such projects irrespective of the area of forest land involved to the Regional Empowered Committee being constituted at each Regional Office of the Ministry.
The Ministry has also issued guidelines to provide that in case of linear projects in-principle approval under the Forest (Conservation) Act, 1980 may be deemed as the working permission for tree cutting and commencement of work, if the required funds for compensatory afforestation, Net Present Value, wildlife conservation plan, plantation of dwarf species of medicinal plants, and all such other compensatory levies specified in the in-principle approval are realised from the user agency.
10.     Decentralization of powers to State Level Environment Impact Assessment Authorities (SEIAAs) for granting Environment Clearance

Vide Notification S.O.1599 (E) dated 25th June, 2014, more powers have been delegated to SEIAAs to grant EC to various projects. Earlier, the projects in Category ‘B’ were being appraised as Category ‘A’ at MoEF level if they were located within 10 km. of Protected Areas, Critically Polluted Areas, Eco Sensitive Areas, and Inter-state / International boundaries. Now, this distance has been reduced to 5 km. subject to stipulations stated in the aforesaid notification, implying thereby that more projects can now be considered by SEIAAs for granting ECs. Apart from this, the capacity up to which non-molasses based distilleries and mineral beneficiation activities could be considered as Category ‘B’ has been increased. Also, all bio-mass fuel based thermal power plants with capacity greater than or equal 15 MW have been put in Category B’. Earlier, such projects were considered as Category ‘A’ projects, if their capacity exceeded 20 MW.

Courtesy: pib.nic.in

I&B Ministry initiatives to enhance Outreach and information dissemination through multiple platforms

The Ministry of Information & Broadcasting has undertaken key initiatives in the different sectors aimed at enhancing the outreach of policies and programmes across platforms. Some of the initiatives undertaken have been innovative involving people’s participation, enhancing government’s presence on the social media platforms and strengthening communication at the grassroots. Some of the key initiatives are as under:

Launch of new Kisan Channel: Government has allocated an amount of Rs 100 crore to Kisan Channel, which will disseminate real time information to the farmers regarding new farming techniques, water conservation, organic farming etc.

Establishment of Social Media Presence of Government of India: In order to facilitate Ministries/Departments in registering their presence on Social media the Ministry of Information & Broadcasting has organized a half day training workshop on 11th July, 2014 at the National Media Centre.

Launch of new Arun Prabha Channel for North East: In order to provide a strong platform for expression of cultural identities and for creating greater awareness regarding North Eastern Region, the government has announced launching of anew 24x7 Channel for North East called Arun Prabha.

3rd and 4th phase of Digitization: A Task Force has been constituted to steer the remaining two phases i.e., Phase III and Phase IV of digitization in India, which will pave the way for implementation of digitization initiative in India, which will see digitization of about 8 crores Cable TV homes in India. It is also a step towards the Prime Minister’s dream of a Digital India as digitization will enable quick penetration of broadband connectivity in India.

3rd phase of FM radio auction: On the request of this Ministry, TRAI has furnished its recommendations on migration of FM Radio Broadcasters from Phase-II to Phase-III. The issue is being examined.

Goa declared the Permanent Destination for International Films Festival of India: In order to develop the“Brand IFFI" on the lines of other International Film Festivals, the Goa has been declared as the permanent destination for International Films Festival of India.

North East Film Festival: For the first time, a three-day North East Film Festival was held in Delhi (Siri Fort Complex) on a grand scale. It will henceforth be an annual feature, a prominent event in the film festival calendar of the Directorate of Film Festivals.

FTII, SRFTII to be institutes of National Importance: In Order to provide statutory backing through an act of Parliament to declare both the institutes as Institutes of National Importance the government has proposed a Bill. The proposed Bill would enable both the Institutes to award its own degrees and diplomas and start new activities on the lines of IITs and IIMs.


Meeting with stakeholders related to Set-Top-Boxes to promote Indigenization of Digitization: Efforts were taken to fulfill the long pending demand of domestic manufacturers of Set Top Boxes to get tax concession (C Form benefit) in order to compete with imported STBs.

e-initiatives: The office of Registrar of Newspapers for India (RNI) under M/o I&B has streamlined its Single Window Public dealing mechanism at its office. RNI has achieved 100 % success in online e-filing of annual statements by publishers for 2013- 14.

Boost to Community Radio movement in the Country: The government has allotted an amount of Rs 100 crores for“Supporting Community Radio Movement in India”. This would enable setting up of 600 community radio stations across the country in the 12th Five Year Plan. This major initiative of the new government will strengthen the connect with the population living in rural and marginalized areas.

Simplification of Procedures for granting Television licences for starting additional television channels:Ministry of Home Affairs has agreed to the proposal of I&B Ministry for not seeking security clearance for such channels whose security clearance have already been sought earlier along with the Board of Directors. This decision has paved the way for speedy clearance of additional television channel permissions, which will benefit the broadcast industry in a big way. After the decision was taken 23 TV channels have already been permitted by the Ministry.

Proposal cleared for Rs.600 crore National Film Heritage Mission (NFHM) to preserve India’s film legacy:The revised EFC proposal for a Rs. 600 crore National Film Heritage Mission project to preserve India’s filmic legacy was cleared by the Expenditure Finance Committee in the Ministry of Finance on 3rd July, 2014. The draft Cabinet Note has been circulated to the concerned Ministries and the Note will shortly be submitted for approval of the Cabinet.

Peoples' participation in Government Advertising through Crowd- Sourcing of Advertisements: Theadvertisement for the important events being designed on the crowd sourcing model. Independence Day advertisement designed on these lines and DAVP has invited suggestions for the proposed advertisement to be brought out on 5thSeptember to observe “Teachers Day”.

Adopting 360 degree approach to information dissemination: For Independence Day, the advertisements were crowd sourced for the first time and Independence Day coverage was extended to all Media platforms. Similarly, a series of Press Conferences being organized to highlight the initiatives of the Government and the same approach is being adopted to ensure information dissemination across all platforms.

Courtesy: pib.nic.in

Text of Prime Minister Shri Narendra Modi’s special lecture at the University of the Sacred Heart, Tokyo

Courtesy: Photo Division
सभी नौजवान साथियो, 

आपको आश्‍चर्य होता होगा कि किसी देश के प्रधानमंत्री ने आपके कॉलेज में आना क्‍यों पसंद किया, स्‍टूडेंट्स को मिलना क्‍यों पसंद किया। मेरी यह कोशिश है कि अगर दुनिया में भिन्‍न–भिन्‍न समाजों को समझना है, तो दो क्षेत्र बहुत महत्‍वपूर्ण होते हैं। एक, वहां की शिक्षा प्रणाली और दूसरी, वहां के आर्ट एंड कल्‍चर। यह दो महत्‍वपूर्ण पहलू होते हैं, जिससे इतिहास भी समझ में आ जाता है और उस देश की प्रकृति भी समझ में आ जाती है और एक मोटा-मोटा अंदाज लगा सकते हैं कि वो कौन सी बातें हैं जिसके साथ हम बड़ी निकटता से जुड़ सकते हैं। मैंने सुना है कि आपकी इस यूनिवर्सिटी का बड़ा नाम है। यहां के बड़े रहीस, यहां के विद्यार्थी रहे हैं और उसके कारण सहज रूप से जापान और जापान के बाहर आपकी इस यूनिवर्सिटी का काफी संपर्क रहा है। मैंने सुना है भारत के भी बहुत सारे विद्यार्थी कभी न कभी यहां स्‍टूडेंट के रूप में रहे हैं। 

आपके मन में बहुत स्‍वा‍भाविक होगा कि भारत में महिलाओं की क्‍या स्थिति है, किस प्रकार का उनका जीवन है। शायद दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां के सामाजिक जीवन में जो भगवान की कल्‍पना की गई है। उस भगवान की कल्‍पना में विश्‍व में सभी जगह पे, सभी समाजों में ज्‍यादातर पुरूष भगवान की ही कल्‍पना की गई है। एकमात्र भारत ऐसा देश है, जहां ‘स्‍त्री भगवान’ की कल्‍पना की गई है। ‘गॉडेस’ का कंसेप्‍ट है वहां। आज जो मिनिस्‍ट्री का फोरमेशन जो होता है, उसके संदर्भ में हमारी जो पुरानी मिथोलॉजी को सोचूं तो हमारे यहां पूरा एजुकेशन माता सरस्‍वती, गॉडेस सरस्‍वती से जुड़ा हुआ है। अगर पैसों की बात करें, धन की बात करें तो गॉडेस लक्ष्‍मी की कल्‍पना है। अगर आप सोचे कि सिक्‍युरिटी का मामला है होम अफेयर्स की एक्टिविटी है तो महाकाली की कल्‍पना है। अगर फूड सिक्‍युरिटी की सोंचे तो हमारे यहां देवी अन्‍नपूर्णा की कल्‍पना है। यानी पूरी मिनिस्‍ट्री महिलाओं के हाथ में थी। मेजर पोर्टफोलियो महिलाओं के हाथ में थे। यानी इस कल्‍पना से भारत की विशेषता रही है और आपने देखा होगा कि दुनिया में कई देश ऐसे हैं कि जहां आज भी चीफ ऑफ द स्‍टेट के रूप में महिलाओं को प्रधान्‍य नहीं है, लेकिन एशियन कंट्रीज में यह परंपरा रही है। चाहे हिन्‍दुस्‍तान देखिये, बंगला देश देखिये, श्रीलंका देखिये, पाकिस्‍तान देखिये, इंडोनेशिया देखिये इवन थाइलैंड देखिये कोई न कोई हैड ऑफ द कंट्री महिला रही हैं और यह वहां की विशेषता रही है। 

लेकिन भारत जब गुलाम हुआ और जब अंग्रेजों ने हिंदुस्‍तान छोड़ा तो यह बड़ा दुर्भाग्‍य था हमारे देश का, सिर्फ 9 परसेंट विमेन एजुकेशन था। उसके बाद कई इनिशिएटिव लिए गए और व्‍यक्तिगत रूप से मैंने गर्ल चाइल्‍ड एजुकेशन को बहुत ही प्राथमिकता दी है। मैं भारत का प्रधानमंत्री बना, उससे पहले मैं भारत के वेस्‍टर्न पार्ट में एक छोटा सा स्‍टेट है गुजरात, मैं उस गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में मैंने गर्ल चाइल्‍ड एजुकेशन पर एक बहुत बड़ा इनीशिएटिव लिया था। मैंने अपने आप को डेडिकेट किया था, गर्ल चाइल्‍ड एजुकेशन के लिए। 

गर्ल चाइल्‍ड एजुकेशन के प्रति मेरा इतना लगाव है, मेरे मन में इतना भाव जगा है कि जैसे, हेड ऑफ द स्‍टेट कई सारे फंक्‍शन में जाते हैं तो बहुत सारे गिफ्ट मिलते हैं, नई-नई चीजें लोग देते हैं, हिन्‍दुस्‍तान में ऐसी परंपरा है। मैं सारी चीजें ट्रेजरी में जमा करता था। जमा करने के बाद उसकी ऑक्‍शन करता था। ऑक्‍शन से जो पैसा आता था, वह सारे पैसे मैं गर्ल चाइल्‍ड एजुकेशन के लिए डोनेट कर देता था। 

मैं 14 साल मुख्‍यमंत्री रहा। 14 साल में जो चीजें मुझे मिली थी, जो छोटी-मोटी चीजें मिली थी, उसकी नीलामी की। जब मैंने गुजरात छोड़ा तो मैंने 78 करोड़ रुपये गुजरात सरकार की तिजोरी में जमा कराये थे, जो बच्चियों की शिक्षा के लिए खर्च किये जा रहे हैं। 

भारत की एक और जानकारी भी शायद आपके लिए आश्‍यर्चजनक होगी, वहां के पोलिटिकल सिस्‍टम में एक लोकल सेल्‍फ गवर्नमेंट होती है, लोग अपना म्‍युनिसिपेलिटी का चुनाव करते हैं, पंचायत का चुनाव करते हैं, और उसका जो बॉडी बनता है वह पांच साल के लिए वहां का कारोबार चलाते हैं। आपको जानकर खुशी होगी कि वहां 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण है। कोई भी इलेक्‍टेड बॉडी होगा, लोकल लेवल पर, जहां 33 प्रतिशत महिलाओं का रिप्रजेंटेशन जरूरी है। इतना ही नहीं, हर सेकेंड इयर के बाद, चीफ आफ दि यूनिट, वह भी महिला ही होती है। कभी मेयर महिला बनती हैं, कभी डिस्ट्रिक प्रेसिडेंट महिला बनती हैं, कभी ब्‍लॉक प्रेसिडेंट महिला बनती हैं। इसलिए वहां डिसीजन मेकिंग प्रोसेस में महिलाओं को प्राथमिकता देने का एक संवैधानिक कानूनी प्रबंध किया गया है। 

आपको जानकार यह भी खुशी होगी कि अभी-अभी जो मेरी सरकार बनी है, 100 दिन हुए हैं सरकार को। मेरा जो कैबिनेट है, कैबिनेट में 25 प्रतिशत महिला हैं। इतना ही नहीं, हमारी जो विदेश मंत्री हैं, वह भी महिला ही हैं। तो आप कल्‍पना कर सकते हैं कि भारत में बहुत प्रयत्‍न पूर्वक इस 50 प्रतिशत पोपुलेशन को विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी बनाने के लिए शैक्षणिक क्षेत्र से, राजनीतिक क्षेत्र से जीवन को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास किया है। 

हमारे सामने एक बहुत बड़ी चुनौती यह है कि जितना हम शिक्षा प्राप्‍त करते हैं, साइंस, टेक्‍नोलोजी, कंप्‍यूटर वर्ल्‍ड, कभी-कभी डर रहता है कि आज भी इस व्‍यवस्‍था से हम रोबोट तो तैयार नहीं कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि आपके इस विश्‍वविद्यालय में ह्यूमेनिटी पर जोर है। उसका प्राइमरी जो शिक्षा है, वह इन सब विषयों से जुड़ी हुई है। मैं मानता हूं कि ये ह्यूमेनिटी का जो कंसेप्‍ट है, तकनीक कितनी ही आगे क्‍यों ना बढ़े, कितने ही रोबोट क्‍यूं न तैयार करें, पर मानवीय संवेदना के बिना जीवन असंभव है। और इसलिए मैं कभी-कभी कहता हूं, साइंस ऑफ थिकिंग एंड आर्ट ऑफ लिविंग, ये दोनों का कॉम्बिनेशन चाहिए। मेरे लिए खुशी की बात है कि मुझे आज आप सबसे मिलने का मौका मिला। 

आपमें से कितने लोग हैं जो कभी हिन्‍दुस्‍तान गए हैं ? 

आपमें से कितने हैं, जिनकी हिन्‍दुस्‍तान जाने की इच्‍छा है ? 

तो आप सब लोगों का हिन्‍दुस्‍तान में स्‍वागत है। जरूर आइए। भारत एक बहुत बड़ा, विशाल देश है, उसे देखिए। मैं इस विश्‍वविद्यालय के सभी महानुभावों का आभारी हूं कि आप सबके साथ बात करने का अवसर मिला। धन्‍यवाद। 

Courtesy: pib.nic.in

PM's special lecture at the University of the Sacred Heart, Tokyo

"Commitment to peace is ingrained in the DNA of Indian society. This commitment is far above international treaties or processes."

"Like a lamp in the dark, India and Japan should focus on shared values of democracy, development and peace."


The Prime Minister, Shri Narendra Modi, has said that commitment to peace and non-violence is ingrained in the DNA of the Indian society. He was responding to questions from students after delivering a special lecture at the University of the Sacred Heart in Tokyo. In reply to a question on how India could enhance the confidence of the international community as a non-NPT state, the Prime Minister said this commitment to peace that was intrinsic to Indian society, has significance far above any international treaties or processes. India is the land of Lord Buddha, who lived for peace, and spread the message of peace across the world, he said, adding that India had won its freedom through non-violent means. For thousands of years, India has believed in the principle of Vasudhaiva Kutumbakam – the whole world is our family, Shri Narendra Modi said. When we consider the whole world as our family, how can we even think of doing anything that would harm or hurt anyone, he said. 

In response to another question, the Prime Minister called for India and Japan to focus on shared values of democracy, development, and peace, saying this effort would be similar to lighting a lamp in the dark. Illustrating his point, the Prime Minister said an intelligent person would fight darkness in a room not with a broom, sword or blanket, but with a small diya (earthen lamp). “If we light a lamp, we need not be scared of darkness,” the Prime Minister said. 

Replying to a question on environment, the Prime Minister said India had, for centuries, a tradition of dialogue (sanvaad) with nature. People in India think of the whole universe as their family, the Prime Minister said, saying that children call the moon their uncle, and rivers are addressed as “Mother.” He asked the assembled students if they felt “climate change” was a correct terminology. He said that human beings had actually changed their “habits” leading to strife with nature. This strife with nature had caused problems, the Prime Minister said. He referred to a book - “Convenient Action” - that he had written on the subject, and invited students to read it online, if they were interested. 

The Prime Minister invited the students to ask him questions on social media, saying he would be happy to answer them, and adding that he and Japanese Prime Minister Shinzo Abe were friends online as well. 

Earlier, addressing the students at this all-women University, the Prime Minister said that if we have to understand different societies across the world, two things are important – their education system and their art and culture, which is why he had come to their University. Referring to the position held by women in Indian tradition and culture, he said that India had the concept of Goddesses, unlike most parts of the world, where God is usually referred to only as a Father. He also mentioned initiatives he had taken for education of the girl child while he was Chief Minister of Gujarat. 

Courtesy: pib.nic.in