Friday, 25 May 2018

Text of PM’s address at the convocation of Visva Bharati University at Santiniketan in West Bengal

मंच पर विराजमान बंग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी, पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल श्रीमान केसरी नाथ जी त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी जी, विश्‍व भारती के उपाचार्य प्रोफेसर सबूज कोली सेन जी और रामकृष्‍ण मिशन विवेकानंद इंस्‍टीटयूट के उपाचार्य पूज्‍य स्‍वामी आत्‍मप्रियानंद जी और यहां मौजूद विश्‍व भारती के अध्‍यापकगण और मेरे प्‍यारे युवा साथियों।

मैं सबसे पहले विश्‍व भारती के चांसलर के नाते आप सबकी क्षमा मांगता हूं। क्‍योंकि जब मैं रास्‍ते में आ रहा था। तो कुछ बच्‍चे इशारे से मुझे समझा रहे थे कि पीने का पानी भी नहीं है। आप सबको जो भी असुविधा हुई है। चांसलर के नाते ये मेरा दायित्‍व बनता है और इसलिए मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा मांगता हूं।

प्रधानमंत्री होने के नाते मुझे देश के कई विश्‍वविद्यालयों के convocation में हिस्‍सा लेने का अवसर मिला है। वहां मेरी सहभागिता अतिथि के रूप में होती है लेकिन यहां मैं एक अतिथि नहीं बल्कि आचार्य यानि चांसलर के नाते आपके बीच में आया हूं। यहां जो मेरी भूमिका है वो इस महान लोकतंत्र के कारण है। प्रधानमंत्री पद की वजह से है। वैसे ये लोकतंत्र भी अपने आप में एक आचार्य तो है जो सवा सौ करोड़ से अधिक हमारे देशवासियों को अलग-अलग माध्‍यमों से प्रेरित कर रहा है। लोकतांत्रिक मूल्‍यों के आलोक में जो भी पोषित और शिक्षित होता है वो श्रेष्‍ठ भारत और श्रेष्‍ठ भविष्‍य के निर्माण में सहायक होता है।
हमारे यहां कहा गया है। कि आचार्यत विद्याविहिता साघिष्‍ठतम प्राप्‍युति इति यानि आचार्य के पास जाएं उसके बगैर विद्या, श्रेष्‍ठता और सफलता नहीं मिलती। ये मेरा सौभाग्‍य है कि गुरुदेव रविन्‍द्र नाथ ठाकुर की इस पवित्र भूमि पर इतने आचार्यों के बीच मुझे आज कुछ समय बिताने का सौभाग्‍य मिला है।

जैसे किसी मंदिर के प्रागंन में आपको मंत्रोच्‍चार की ऊर्जा महसूस होती है। वैसी ही ऊर्जा मैं विश्‍व भारती, विश्‍वविद्यालय के प्रागंन में अनुभव कर रहा हूं। मैं जब अभी कार से उतरकर मंच की तरफ आ रहा था तो हर कदम, मैं सोच रहा था कि कभी इसी भूमि पर यहां के कण-कण पर गुरुदेव के कदम पड़े होंगें। यहां कहीं आस-पास बैठकर उन्‍होंने शब्‍दों को कागज पर उतारा होगा। कभी कोई धुन, कोई संगीत गुनगुनाया होगा। कभी महात्‍मा गांधी से लंबी चर्चा की होगी। कभी किसी छात्र को जीवन का, भारत का, राष्‍ट्र के स्‍वाभिमान का मतलब समझाया होगा।

साथियों, आज इस प्रागंण में हम परंपरा को निभाने के लिए एकत्र हुए हैं। यह अमरकुंज लगभग एक सदी से ऐसे कई अवसरों का साक्षी रहा है। बीते कई वर्षों से जा आपने यहां सीखा उसका एक पड़ाव आज पूरा हो रहा है। आपमें से जिन लोगों को आज डिग्री मिली है उनको मैं ह्दयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और भविष्‍य के लिए असीम शुभकामनाएं मैं उनको देता हूं। आपकी ये डिग्री, आपकी ये शैक्षिणिक योग्‍यता का प्रमाण है। इस नाते ये अपने-आप में महत्‍वपूर्ण है। लेकिन आपने यहां सिर्फ ये डिग्री ही हासिल की है ऐसा नहीं है। आपने यहां से जो सीखा, जो पाया वो अपने आप में अनमोल है। आप एक समृद्ध विरासत के वारिस है। आपका नाता एक ऐसी गुरु शिष्‍य परंपरा से है। जो जितनी पुरातन है उतनी ही आधुनिक भी है।

वैदिक और पौराणिक काल में जिसे हमारे ऋषियों-मुनियों ने सींचा। आधुनिक भारत में उसे गुरुदेव रवीन्‍द्रनाथ टैगोर जैसे मुनिषयों ने आगे बढ़ाया। आज आपको जो ये सप्‍तपरिणय का गुच्‍छ दिया गया है। ये भी सिर्फ पते नहीं है। बल्कि एक महान संदेश है। प्र‍कृति किस प्रकार से हमें एक मनुष्‍य के नाते, एक राष्‍ट्र के नाते उत्‍तम सीख दे सकती है। ये उसी का एक परिचायक, उसकी मिसाल है। यही तो इस अप्रतिम संस्‍था के पीछे की भावना, यही तो गुरुदेव के विचार हैं, जो विश्‍व भारती की आधारशिला बनी।

भाईयों और बहनों यत्र विश्‍वम भवेतेक निरम यानि सारा विश्‍व एक घोसला है, एक घर है। ये वेदों की वो सीख है। जिसको गुरुदेव ने अपने बेशकीमती खजाने के विश्‍व भारती का धैय वाक्‍य बनाया है। इस वेद मंत्र में भारत की समृद्ध परंपरा का सार छुपा है। गुरुदेव चाहते थे कि ये जगह उद्घोषणा बने जिसको पूरा विश्‍व अपना घर बनाए। घोसले और घरोंदों को जहां एक ही रूप में देखा जाता है। जहां संपूर्ण विश्‍व को समाहित करने की भावना हो। यही तो भारतीयता है। यही वसुधैव कुटुम्‍बकम् का मंत्र है। जो हजारों वर्षों से इस भारत भूमि से गुंजता रहा और और इसी मंत्र के लिए गुरुदेव ने पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।

साथियों वेदों, उपनिषदों की भावना जितनी हजारों साल से पहले से सार्थक थी उतनी ही सौ साल पहले जब गुरुदेव शांति निकेतन में पधारे। आज 21वीं सदी की चुनौतियों से जुझते विश्‍व के लिए भी ये उतनी ही प्रासंगिक है। आज सीमाओं के दायरे में बंधे राष्‍ट्र एक सच्‍चाई है। लेकिन ये भी सच है इस भू-भाग की महान परंपरा को आज दुनिया globalization के रूप में जी रही है। आज यहां हमारे बीच में बंग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी भी मौजूद हैं। शायद ही कभी ऐसा मौका आया हो। कि एक convocation में दो देश के प्रधानमंत्री मौजूद हों।

भारत और बंग्‍लादेश दो राष्‍ट्र हैं लेकिन हमारे हित एक-दूसरे के साथ समन्‍वय और सहयोग से जुड़े हुए हैं। culture हो या public policy हम एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इसी का एक उदाहरण बंग्‍लादेश भवन है। जिसका थोड़ी में हम दोनों वहां जाकर के उद्घाटन करने वाले हैं। ये भवन भी गुरुदेव के vision का ही प्रतिबिंब है।

साथियों, मैं कई बार हैरान रह जाता हूं। जब देखता हूं कि गुरुदेव का व्‍यक्तित्‍व का ही नहीं बल्कि उनकी यात्राओं का विस्‍तार भी कितना व्‍यापक था। अपनी विदेश यात्राओं के दौरान मुझे अनेक ऐसे लोग मिलते हैं। जो बताते हैं कि टैगोर कितने साल पहले उनके देश में आए थे। उन देशों में आज भी बहुत सम्‍मान के साथ गुरुदेव को याद किया जाता है। लोग टैगोर के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश करते हैं।

अगर हम अफगानिस्‍तान जाएं तो काबुली वाला की कहानी का जिक्र हर अफगानिस्‍तानी करता ही रहता है। बड़े गर्व के साथ करता है। तीन साल पहले जब मैं तजाकिस्‍तान गया तो वहां पर मुझे गुरुदेव की एक मूर्ति का लोकार्पण करने का भी अवसर मिला था। गुरुदेव के लिए वहां के लोगों में जो आदर भाव मैंने देखा वो मैं कभी भूल नहीं सकता।

दुनिया के अनेक विश्‍वविद्यालयों में टैगोर आज भी अध्‍ययन का विषय है। उनके नाम पर chairs हैं अगर मैं कहूं कि गुरुदेव पहले भी ग्‍लोबल सि‍टिजन थे और आज भी है। तो गलत नहीं होगा। वैसे आज इस अवसर पर उनका गुजरात से जो नाता रहा उसका वर्णन करने के मोह से मैं खुद को रोक नहीं पा रहा। गुरुदेव का गुजरात से भी एक विशेष नाता रहा है। उनके बड़े भाई सत्‍येंद्रनाथ टैगोर जो सिविल सेवा join करने वाले पहले भारतीय थे। काफी समय वे अहमदाबाद में भी रहे। संभवत: वो तब अहमदाबाद के कमीशनर हुआ करते थे। और मैंने कहीं पढ़ा था। कि पढ़ाई के लिए इंगलैंड जाने से पहले सत्‍येंद्रनाथ जी अपने छोटे भाई को छ: महीने तक अंग्रेजी साहित्‍य के अध्‍ययन वहीं अहमदाबाद में कराया था। गुरुदेव की आयु तब सिर्फ 17 साल की थी। इसी दौरान गुरुदेव ने अपने लोकप्रिय नोवल खुदितोपाशान के महत्‍वपूर्ण हिस्‍से और कुछ कविताएं भी अहमदाबाद में रहते हुए लिखी थी। यानि एक तरह से देखें तो गुरुदेव के वैश्विक पटल पर जीत स्‍थापित होने में एक छोटी सी भूमिका हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने की रही है, उसमें गुजरात भी एक है।

साथियों, गुरुदेव मानते थे कि हर व्‍यक्ति का जन्‍म किसी न किसी लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए होता है। प्रत्‍येक बालक अपनी लक्ष्‍य प्राप्ति की दिशा में बढ़ सके इसके लिए योग्‍य उसे बनाना इसमें शिक्षा का महत्‍वपूर्ण योगदान है। वो बच्‍चों के लिए कैसी शिक्षा चाहते थे। उसकी झलक उनकी कविता power of affection में हम अनुभव कर सकते हैं। वो कहते थे कि शिक्षा केवल वही नहीं है जो विद्यालय में दी जाती है। शिक्षा तो व्‍यक्ति के हर पक्ष का संतुलित विकास है जिसे समय और स्‍थान के बंधन में बांधा नहीं जा सकता है। और इसलिए गुरुदेव हमेशा चाहते थे कि भारतीय छात्र बाहरी दुनिया में भी जो कुछ हो रहा है उससे भली-भांति परिचित रहे। दूसरे देशों के लोग कैसे रहते हैं, उनके सामाजिक मूल्‍य क्‍या हैं, उनकी सांस्‍कृतिक विरासत क्‍या है। इस बारे में जानने पर वो हमेशा जोर देते थे। लेकिन इसी के साथ वो ये भी कहते थे। कि भारतीयता नहीं भूलनी चाहिए।

मुझे बताया गया है कि एक बार अमेरिका में agriculture पढ़ने गए अपने दामाद को चिट्ठी लिखकर भी उन्‍होंने ये बात विस्‍तार से समझायी थी। और गुरुदेव ने अपने दामाद को लिखा था कि वहां सिर्फ कृषि की पढ़ाई ही काफी नहीं है। बल्कि स्‍थानीय लोगों से मिलना-जुलना ये भी तुम्‍हारी शिक्षा का हिस्‍सा है। और आगे लिखा लेकिन अगर वहां के लोगों को जानने के फेर में तुम अपने भारतीय होने की पहचान खोने लगो तो बेहतर है कि कमरे में ताला बंद करके उसके भीतर ही रहना।

भारतीय राष्‍ट्रीय आंदोलन में टैगोर जी का यही शैक्षणिक और भारतीयता में ओतप्रोत दर्शन एक दूरी बन गया था। उनका जीवन राष्‍ट्रीय और वैश्विक विचारों का समावेश था जो हमारी पुरातन परंपराओं का हिस्‍सा रहा है। ये भी एक कारण रहा कि उन्‍होंने यहां विश्‍व भारती में शिक्षा की अलग ही दुनिया का सर्जन किया। सादगी यहां की शिक्षा का मूल सिद्धांत है। कक्षाएं आज भी खुली हवा में पेड़ों के नीचे चलाई जाती हैं। जहां मनुष्‍य और प्रकृति के बीच सीधा संवाद होता है। संगीत, चित्रकला, नाट्य अभिनय समेत मानव जीवन के जितने भी आयाम होते हैं, उन्‍हें प्रकृति की गोद में बैठकर निखारा जा रहा है।

मुझे खुशी है कि जिन सपनों के साथ गुरुदेव ने इस महान संस्‍थान की नींव रखी थी। उनको पूरा करने की दिशा में ये निरंतर आगे बढ़ रहा है। शिक्षा को skill development से जोड़कर और उसके माध्‍यम से सामान्‍य मानवी के जीवन स्‍तर को उपर उठाने का उनका प्रयास सराहनीय है।

मुझे बताया गया है यहां के लगभग 50 गांवों में आप लोगों ने साथ मिलकर, आप उनके साथ जुड़कर के विकास के सेवा के काम कर रहे हैं। जब आपके इस प्रयास के बारे में मुझे बताया गया तो मेरी आशाएं और आंकाक्षाएं आपसे जरा बढ़ गई हैं। और आशा उसी से बढ़ती है जो कुछ करता है। आपने किया है इसलिए मेरी आपसे अपेक्षा भी जरा बढ़ गई हैं।

Friends 2021 में इस महान संस्‍थान के सौ वर्ष पूरे होने वाले हैं आज जो प्रयास आप 50 गांव में कर रहे हैं क्‍या अगले दो-तीन वर्षों में इसको आप सौ या दौ सौ गांव तक ले जा सकते हैं। मेरा एक आग्रह होगा कि अपने प्रयासों को देश की आवश्‍यकताओं के साथ ओर जोडि़ए। जैसे आप ये संकल्‍प ले सकते हैं कि 2021 तक जब इस संस्‍थान की शताब्‍दी हम मनाएगें, 2021 तक ऐसे सौ गांव विकसित करेंगे यहां के हर घर में बिजली कनेक्‍शन होगा, गैस कनेक्‍शन होगा, शौचालय होगा, माताओं और बच्‍चों का टीकाकरण हुआ होगा, घर के लोगों को डिजिटल लेनदेन आता होगा। उन्‍हें कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर महत्‍वपूर्ण फार्म ऑनलाइन भरना आता होगा।

आपको ये भली भांति पता है कि उज्‍ज्‍वला योजना के तहत दिए जा रहे गैस कनेक्‍शन और स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे शौचालयों ने महिलाओं की जिंदगी आसान करने का काम किया है। गांवों में आपके प्रयास, शक्ति की उपासक, इस भूमि में नारी शक्ति को सशक्‍त करने का काम करेगा और इसके अलावा ये भी प्रयास किया जा सकता है। कि इन सौ गांवों को प्रकृति प्रेमी, प्रकृति पूजन गांव कैसे बनाया जाए। जैसे आप प्रकृति के सरंक्षण की तरह हैं, कार्य करते हैं। वैसे ही ये गांव भी आपके मिशन का हिस्‍सा बनेगा। यानि ये सौ गांव उस विजन को आगे बढ़ाएं जहां जल भंडारण की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍थाएं विकसित करके जल सरंक्षण किया जाता हो। लकड़ी न जलाकर वायु संरक्षण किया जाता हो। स्‍वच्‍छता का ध्‍यान रखते हुए प्राकृतिक खाद्य का उपयोग करते हुए भूमि संरक्षण किया जा सकता है।

भारत सरकार की गोबर धन योजना का भरपूर फायदा उठा जा सकता है। ऐसे तमाम कार्य जिनकी चेक लिस्‍ट बनाकर आप उन्‍हें पूरा कर सकते हैं।

साथियों, आज हम एक अलग ही विषय में अलग ही चुनौतियों के बीच जी रहे हैं। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2022 तक जबकि आजादी के 75 साल होंगे। न्‍यू इंडिया बनाने का संकल्‍प लिया है। इस संकल्‍प की सिद्धि में शिक्षा और शिक्षा से जुड़ें आप जैसे महान संस्‍थानों की अहम भूमिका है। ऐसे संस्‍थानों से निकले नौजवान देश को नई ऊर्जा देते हैं। एक नई दिशा देते हैं। हमारे विश्‍वविद्यालय सिर्फ शिक्षा के संस्‍थान न बने। लेकिन सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी हो, इसके लिए प्रयास निरंतर जारी है।

सरकार द्वारा उन्‍नत भारत अभियान के तहत विश्‍वविद्यालयों को गांव के विकास के साथ जोड़ा जा रहा है। गुरुदेव के विजन के साथ-साथ न्‍यू इंडिया की आवश्‍यकताओं के अनुसार हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है।
इस बजट में revitalizing infrastructure & system in education यानि RISE नाम से एक नई योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके तहत अगले चार साल में देश के education system को सुधारने के लिए एक लाख करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। Global Initiative of Academic Network यानि ज्ञान भी शुरू किया गया। इसके माध्‍यम से भारतीय संस्‍थाओं ने पढ़ाने के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्‍ठ शिक्षकों को आमंत्रित किया जा रहा है।

शैक्षिक संस्‍थाओं को पर्याप्‍त सुविधाएं मिलें इसके लिए एक हज़ार करोड़ रुपये के निवेश के साथ Higher Education Financing Agency शुरू की गई है। इससे प्रमुख शैक्षिक संस्‍थाओं में High Quality Infrastructure के लिए निवेश में मदद मिलेगी। कम उम्र में ही Innovation का mindset करने के लिए अब उस दिशा में हमें देश भर में 2400 स्‍कूलों को चुना। इन स्‍कूलों में Atal Tinkering Labs के माध्‍यम से हम छठी से 12वीं कक्षा के छात्रों पर फोकस कर रहे हैं। इन Labs में बच्‍चों को आधुनिक तकनीक से परिचित करवाया जा रहा है।

साथियों आपका ये संस्‍थान education में innovation का जीवन प्रमाण है। मैं चाहूंगा कि विश्‍व भारती के 11000 से ज्‍यादा विद्यार्थी innovation को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजनाओं का ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ उठाएं। आप सभी यहां से पढ़कर निकल रहे हैं। गुरुदेव के आर्शीवाद से आपको एक विजन मिला है। आप अपने साथ विश्‍व भारती की पहचान लेकर के जा रहे हैं। मेरा आग्रह होगा आपसे इसके गौरव को और ऊंचा करने के लिए आप निरंतर प्रयास करते रहें। जब समाचारों में आता है कि संस्‍थान के छात्र ने अपने innovation के माध्‍यम से, अपने कार्यों से 500 या हजार लोगों की जिंदगी बदल दी तो लोग उस संस्‍थान को भी नमन करते हैं।

आप याद रखिए, जो गुरुदेव ने कहा था “जोदि तोर दक शुने केऊ ना ऐशे तबे एकला चलो रे” अगर आपके साथ चलने के लिए कोई तैयार नहीं है तब भी अपने लक्ष्‍य की तरफ अकेले ही चलते रहो। लेकिन आज मैं यहां आपको यह कहने आया हूं। कि अगर आप एक कदम चलेंगे तो सरकार चार कदम चलने के लिए तैयार है।

जनभागीदारी के साथ बढ़ते हुए कदम ही हमारे देश की 21वीं सदी में उस मकाम तक ले जाएगें जिसका वो अधिकारी है। जिसका सपना गुरुदेव ने भी देखा था।

साथियो गुरुदेव ने अपने निधन से कुछ समय पहले गांधी जी को कहा था कि विश्‍व भारती वो जहाज है। जिसमें उनके जीवन का सबसे बहुमूल्‍य खजाना रखा हुआ है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई थी कि भारत के लोग हम सभी इस बहुमूल्‍य खजाने को संजोकर रखें। तो इस खजाने को न सिर्फ संजोने बल्कि इसको और समृद्ध करने की बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी हम सब पर है। विश्‍व भारती विश्‍वविद्यालय न्‍यू इंडिया के साथ-साथ विश्‍व को नए रास्‍ते दिखाती रहे। इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं।

आप अपने, अपने माता-पिता, इस संस्‍थान और इस देश के सपनों को साकार करें इसके लिए आपको एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

*****
Courtesy; pib.nic.in

NDCP 2018: Public can give comments till 1st June

The Department of Telecommunications (DoT) has extended the last date for submission of comments on the recently published draft National Digital Communications Policy(NDCP), 2018. Public and stakeholders can give their comments till 1st June 2018 through the MyGov portal, where the draft Policy has been hosted for public comments. It can be accessed at https://innovate.mygov.in/draft-ndcp-2018/

Several stakeholders had requested DoT to provide more time for giving inputs on the draft Policy. Earlier the deadline was set as 25th May 2018.

The DoT had released the draft NDCP on 1st May 2018 for public comments. The key objectives of the Policy include broadband for all, creating 4 million additional jobs in the Digital Communications sector, enhancing the contribution of the Digital Communications sector to 8% of India’s GDP from around 6% in 2017, propelling India to the Top 50 Nations in the ICT Development Index of ITU from 134 in 2017, enhancing India’s contribution to Global Value Chains, and ensuring Digital Sovereignty of the country.

Courtesy: pib.nic.in

Shri Ravi Shankar Prasad to inaugurate cloud enabled Data Centre at Bhubaneshwar

National Informatics Centre has set up a new state-of-the-art cloud enabled National Data Centre at Bhubaneswar. The data center to be inaugurated by Union Minister of Electronics & IT and Law & Justice, Sh. Ravi Shankar Prasad in the presence of Union Minister of Petroleum & Natural Gas and Skill Development & Entrepreneurship, Sh. Dharmendra Pradhan willoffer 24*7 operations with secure hosting for e-Governance applications of the Government and its departments. The unified and shared infrastructure is flexible enough to rapidly respond to Infrastructure requirements and also accommodate future technology enhancements, distributed applications, database applications running on bare metal, virtualized applications running in multi-hypervisor environments, and cloud-based applications that are available on demand.

A centralized cloud environment has been established to host multiple applications with simplified operations and increased application responsiveness to support the new generation of distributed applications while accommodating existing virtualized and non-virtualized environments. The Data Centre and Cloud Services are being offered from the Data Centres established by NIC.

The ICT Infrastructure at Bhubaneswar will be energized in the modular fashion with software defined ICT Infrastructure. This will facilitate provisioning of services over Cloud with more agility and will also integrate with the NIC National Cloud Services.

The National Cloud Services Bhubaneswar will provide following benefits:

• On-demand access to ICT Infrastructure to ensure easy availability and quick deployment of applications.

• Standardized platforms of deployment to deliver ICT systems that are compliant to government policies and enable easy sharing of data across applications.

• Service-oriented approach for sharing ICT infrastructure to achieve economies of scale.

• Cost-effective, service-oriented approach for sharing computing resources.

Release of NIC Services

During the Inaugural event, the following portals will be released under NIC Offerings:

All districts of Odisha has been converted into SwaaS websites: In a major boost, all districts of Odisha have migrated into NIC's S3WaaS platform (Secure, Scalable & Sugamya Website as a Service).

Districts are the key entities in the government structure where actual execution of schemes and programmes take place and district level websites is an implicit cyber space and an important link between the administration and citizen. S3Waas has been envisaged to bridge this gap and built with an objective to empower the District administrations to generate, configure, deploy and manage secure, scalable and accessible websites for publishing district specific information and services without much effort and technical knowhow.

Launch of E-Saubhagya- Mobile Application

With the launching of NDC Bhubaneswar Cloud service offerings of NIC would allow departments to provision infrastructure and add to the computing capacity on demand and release them when not required. This elastic nature of the cloud allows departments not only to bring the solution to deployment quickly but also to scale up based on the demand of peak or low loads. In the traditional model departments has to budget and procure infrastructure at the commencement of the project, this results in either over provisioning of infrastructure or under sizing of the requirements which leads to scalability challenges. This would result in waste of resources and refreshing technology would take longer.

The Data Centres are the ideal solutions for offering a robust & highly available infrastructure with adequate redundancy enabling government to render effectively the e-Governance services to the citizens. Realizing the importance of Data Centres, National Informatics Centre (NIC) has established National Data Centres at Delhi, Hyderabad and Pune. The establishment of National Data Centre at Bhubaneswar will further enhance the range of Data Centre related services offered by NIC.

National Informatics Centre (NIC) was established in 1976, and has since emerged as a "prime builder" of e-Government / e-Governance applications up to the grassroots level as well as a promoter of digital opportunities for sustainable development. NIC, through its ICT Network, "NICNET", has institutional linkages with all the Ministries /Departments of the Central Government, 36 State Governments/ Union Territories, and about 708 District administrations of India. NIC has been instrumental in steering e-Government/e-Governance applications in government ministries/departments at the Centre, States, Districts and Blocks, facilitating improvement in government services, wider transparency, promoting decentralized planning and management, resulting in better efficiency and accountability to the people of India.

Courtesy: pib.nic.in

Thursday, 24 May 2018

Union Minister of Agriculture and Farmers’ Welfare meets Ms. Carola Schouten, Deputy Prime Minister and Minister of Agriculture, Nature and Food Quality of Netherlands

India & Netherlands discuss ways to strengthen partnership in agriculture and allied sectors

Union Agriculture Minister stresses on need for infusing modern technology in India’s agriculture with focus on making technology affordable to small and marginal farmers


Union Minister of Agriculture and Farmers’ Welfare Shri Radha Mohan Singh today met Ms. Carola Schouten, Deputy Prime Minister and Minister of Agriculture, Nature and Food Quality, Netherlands in Krishi Bhawan, New Delhi and expressed his desire to further strengthen the existing partnership between the two countries in agriculture and allied sectors.

Shri Singh reiterated the Government’s resolve to double the income of farmers by 2022 and the initiatives taken & stressed on the need for infusing modern technology in India’s agriculture. He further added that Netherlands is a global leader in construction of greenhouses as well as in the cultivation of flowers, plants and vegetables, and the diversification of agriculture sector into areas like livestock and plant-cultivation sectors.”

Shri Singh expressed happiness at the regular convening of Joint Working Group, the 5th having been held in March 2018, where discussions on a wide range of issues took place and extended the Action Plan till 2021.

Union Agriculture Minister said a major success of the Indo Dutch collaboration has been the commissioning of the Centre of Excellence (CoEs) for vegetables at Baramati in Maharashtra. The second CoE for flowers at Talegaon, Maharashtra will be ready soon. Others are in various stages of completion and the focus is on making technology affordable to the small and marginal Indian farmers.

Shri Singh said other identifiable areas of interest for further cooperation such as technology for crop residue management and cooperation in the field of bovine breeding; dairy development, animal health and porcine development etc. are also being looked into.

Courtesy: pib.nic.in

Education must aim at holistic development of an individual: Vice President

Students should also consider becoming entrepreneurs, job givers;

Addresses students of Mizoram University

The Vice President of India, Shri M. Venkaiah Naidu has said that education must aim at holistic development of an individual by imbuing the right qualities of head and heart. He was addressing the gathering after inaugurating the Academic & Seminar Complex and laying the foundation stone for Students and Research Scholars’ Hostel at Mizoram University, in Aizawl, Mizoram today. The Governor of Mizoram, Lt. Gen. (Retd.) Nirbhay Sharma, the Chief Minister of Mizoram, Shri. Lal Thanhawla and other dignitaries were present on the occasion.

The Vice President said that better infrastructure creates better conditions for quality learning to take place. He further said that it is a necessary catalyst for improving the quality in any educational institution. This campus with its infrastructure and lively environment will be a congenial place for youngsters to pursue academic ambitions and realize their dreams, he added.

The Vice President said that education must prepare the students of today to take on the challenges of tomorrow. It must not only equip them with the latest knowledge but also impart the required skill sets to enable them to be successful in their chosen fields, he added.

The Vice President advised the students also to consider becoming entrepreneurs, job givers and not merely job seekers. He further said that they have a number of alternative career paths and choose the one that they feel passionate about and work to build up their skill set accordingly. Education is for enhancement of our competence, for empowerment, for enlightenment and for employment and enhancing our employability, he added.

Following is the text of Vice President’s address:

“I am indeed extremely pleased to join you all at the inauguration of the Academic and Seminar Complex and laying of the foundation stone for Students and Research Scholars’ Hostel in this beautiful campus of Mizoram University.

Better infrastructure creates better conditions for quality learning to take place. It is a necessary catalyst for improving the quality in any educational institution. I am, therefore, pleased that these new buildings are being inaugurated and for another set of buildings, foundation has been laid.

Mizoram University, I am hopeful, will make use of these facilities and emerge as one of the leading institutions in the country.

I strongly believe that it will become an important centre of education and research not only for the students of Mizoram, but for all those living in the North East India. This campus with its infrastructure and lively environment will be a congenial place for youngsters to pursue academic ambitions and realize their dreams.

I am pleased to see that the University has made tremendous efforts in promoting academics in the fields of Science, Arts, Commerce, and Engineering.

I am aware that Mizoram University with two campuses is striving hard to provide quality education to the people of Mizoram with 32 affiliated colleges in the state of Mizoram. I am told that Mizoram University was ranked 81th under the ‘University Ranking’ by NIRF, MHRD.. There is lot of scope for improvement and I am sure the University’s ranking will improve in the coming years.

I am happy to note that Mizoram University, located amid scenic hills, is home to regenerating tropical wet evergreen and semi-evergreen forests, including a protected forested water catchment reserve in the north and a small biodiversity park. You are truly blessed to have such wonderful natural surroundings.

I am also happy to note that major energy needs of the campus are met through solar power.

Sisters and Brothers,

Education must prepare the students of today to take on the challenges of tomorrow. It must not only equip them with the latest knowledge but also impart the required skill sets to enable them to be successful in their chosen fields. Education must aim at holistic development of an individual by imbuing the right qualities of head and heart.

Education is for enhancement of our competence, for empowerment, for enlightenment and for employment and enhancing our employability.

Education must lay the foundation for a strong character with uncompromising integrity, ethical values and inclusive outlook. It is imperative for today’s youngsters to be the torchbearers of a New India that will take its rightful place in the comity of nations.

The biggest strength of our country is the human resource capital—today about 65 per cent of the population is below the age of 35 years. We need to fully tap this human resource potential to make India a leading economic power in the world. For that to happen, institutions like Mizoram University must play a pivotal role and reorient their syllabi as also the teaching methods.

Dear students,

India has made rapid strides in various fields since attaining Independence. Yet the country is still grappling with problems like poverty, illiteracy, atrocities on women and weaker sections, religious fundamentalism and terrorism. We have to collectively strive to eradicate various problems hampering the progress of the country. 

Students are the future citizens of the country. In this globalized, highly competitive era, possessing a graduation or post-graduation degree is not enough and one needs to undergo job-oriented training. The universities in collaboration with the industries must initiate training programmes that are in tune with the demands of the market. On its part, the government has launched a massive Skill India programme to provide employment avenues to lakhs of youth across India.

As a matter of fact, the employers are facing difficulty in finding recruits with requisite competencies. Hence, skills training helps develop job-related competencies to enable the candidates excel in their career. The students must utilize various opportunities provided by the Government of India particularly for improvement of skills, through various skill development courses. Depending on the type of career or profession you choose, specific skills and abilities have to be acquired, apart from possessing a sound knowledge required for the job.

Dear Students,

You should also consider becoming entrepreneurs, job givers and not merely job seekers. You have a number of alternative career paths. Choose the one that you feel passionate about and work to build up your skillset accordingly.

Sisters and brothers,

I am glad that this University is focusing on research and there are quite a few researchers in the audience today. Research and teaching are two main functions of any University. It is important that we must improve the quality of both these. We should focus on relevant research so that we find practical solutions to contemporary problems.

I am very happy to note that Mizoram University has introduced several MOOC courses, job oriented certificate and diploma courses, and skill development courses for training of students. 

Sisters and brothers,

As the country’s economy moves on to a higher trajectory, more and more opportunities will open up for the youth. In fact, a news report recently stated that a study by a global executive search firm had forecast that India will be the only major economy with potential for talent surplus by 2030.

With the Union Government’s Look East and Act East policy, a lot many opportunities will most likely open up. Please try to keep yourself aware of emerging opportunities and seize them- first to enhance your knowledge and later to access career opportunities.

My suggestion to all of you is not to tread on beaten paths. Be creative, innovative and explore unchartered territories for making a mark in your career. Finally, I would like to recall the advice given by former President A P J Abdul Kalam—dream big and work hard to achieve your goals. There is no substitute to hard word, dedication and perseverance. Remember that there are no short cuts either to success. 

In fact, Dr. Kalam and Prime Minister, Shri Narendrabhai Modi are the best examples of how an ordinary citizen through hard work and dedication can rise to occupy the highest positions in the country. Both of them coming from very humble backgrounds are a source of inspiration to all Indians.

Dear students, our country has a rich civilizational history and culture, which has survived through the ages. It is important for all you to remain connected with our culture, traditions, heritage, customs and ethos, irrespective of time and place. With the campus located in such exquisite natural surroundings, I am sure all of you are aware of the importance to co-exist with the nature. Live with nature and promote culture for a better future.

I hope that the Mizoram University will emphasize these aspects and achieve the objectives of the University by imparting quality education and training to students.

My best wishes to students, scholars, faculty and employees of the University for a great future ahead.

Courtesy: pib.nic.in

Secularism, Social-Communal Harmony and Tolerance is in the DNA of India: Mukhtar Abbas Naqvi

Union Minister for Minority Affairs Shri Mukhtar Abbas Naqvi today said that "secularism, social-communal harmony and tolerance" is in the DNA of India and compared to the entire world, constitutional, social, cultural and religious rights of minorities are more safe and secure in India.

During a meeting with a delegation of “Diocese of Delhi- Church of North India” Shri Naqvi said that the Central Government led by Prime Minister Shri Narendra Modi is working with commitment to “Sabka Sath, Sabka Vikas” and “Development with Dignity” with complete honesty and without any discrimination.

He said that the Government has broken every barrier including caste, religion, region and it is moving forward towards “inclusive growth” to ensure that not a single Indian is deprived of the light of development. He added that the government is committed to protect all constitutional institutions, democratic values and religious rights of all sections. Shri Naqvi called for caution against those forces who want to disturb the atmosphere of trust and development due to their “prejudiced mindset and vested interests”. He said, that social-communal harmony is our culture and tolerance is our commitment and we all have to work together to protect and strengthen this culture and commitment.

Shri Naqvi said that Prime Minister Shri Narendra Modi is working for all religions and castes without any discrimination. The Government's “Jan Dhan Yojana”, "Skill India", "Start Up India", "Stand Up India", "Mudra Yojana”, "Ujjwala Yojana" have benefited a large number of poor, weaker sections, minorities and women. The Minister said that the work done for the socio-economic-educational empowerment of minorities in the last 48 months had not been done even in 48 years. Programmes such as "Garib Nawaz Kaushal Vikas Yojana", "Hunar Haat", "Nai Manzil”, “Seekho aur Kamao”, "Begum Hazrat Mahal Girls Scholarship", "Nai Udaan”, “Naya Savera” etc have proved to be the milestone for the empowerment of minorities.

The Minister said that he regularly meets with various delegations of Minority communities to take a stock of ground reality to ensure that schemes aimed at their socio-economic-educational empowerment are implemented effectively.

The thirteen member delegation, led by Revd. Dr. Suresh Kumar, vice-president of Diocese of Delhi (CNI), comprised of people from various fields such as- Revd. Kamal Jerald Rodgers Mall, Revd. Mohit Heinz Hitter, Mrs Anuradha Amos, Principal; Mrs Poornima Lall, Principal; Mrs K Sudha, Principal; Ms Swati Paul, Principal; Ms Olivia Biswas, Teacher; and others.

Courtesy: pib.nic.in

CVC calls for preventive vigilance to check malpractices

The Central Vigilance Commissioner (CVC) Shri K.V. Chowdary has called for preventive vigilance to check occurrence of corrupt practices. Speaking at the inauguration of a workshop on “Preventive Vigilance- Dissemination of Good Practices” here today, he said, this can be achieved by identifying and plugging vulnerable areas through systemic improvements and structural remedies. He said these measures fulfil the objective of preempting corrupt practices and further enhance the organisational efficiency. 

Shri Chowdary said while probable vulnerable areas are unique to organisations, few commonly occurring corrupt practices are in areas like procurement, sale of goods and services, human resource management, delivery of services to public and enforcement. He called for improving existing systems, reviewing processes for simplification, leveraging technology, reducing personal discretion, effective control and supervision, educating citizens and training for bringing about transparency and accountability in organisations.

The one-day workshop has five sessions where government organisations and Public Sector Undertakings including Financial Institutions gave presentations and shared good practices adopted by them. Some of the themes for discussion included IT-based recruitment system, use of geospatial technology for infrastructure and planning, vehicle monitoring system, leveraging technology for preventive vigilance, digitisation of land records and systemic improvements in concept of concurrent audit.

Courtesy: pib.nic.in

Text of PM’s address at the convocation of Visva Bharati University at Santiniketan in West Bengal

मंच पर विराजमान बंग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी, पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल श्रीमान केसरी नाथ जी त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत...